कुछ ही दिन पहले स्नैपचेट ने एक नया फ़िल्टर लांच किया जिसके चलते आदमी अपनी चेहरे की तस्वीर खींच कर ये पता लगा सकता है की वो बचपन में केसा दिखता होगा इस फ़िल्टर ने आते ही उत्पात मचा दिया है यहाँ तक की चौदह पंद्रह साल वाले निब्बा-निब्बी जो अपने आप को नौजवान समझने लगे हैं वो भी इस फ़िल्टर का प्रयोग करने से बाज नहीं आ रहे।
इंसान के द्वारा की जा रही उन्नति वाकयी में क़ाबिले तारीफ हैं लेकिन इस उन्नति के फायदे होने के साथ साथ नुकसान भी होते हैं और वैसा ही हुआ।
दरअसल इस फ़िल्टेर को लेकर हद्द तो तब हुयी जब गुप्ता जी के बेटे ने इस फ़िल्टर का उपयोग किया और उसके बचपन की तस्वीर निकल कर आयी जो कि उसके पडोसी शुक्ला जी के चार साल के बचे से हूबहू मिलने लगी, तस्वीर देखते ही युवक के पैरों तले से ज़मीन खिसक गयी और वे मौके पर ही बेहोश हो कर गिर गया।
जब इस बात का पता गुप्ता जी को चला तो पहले तो उन्होंने इस ऐप को अपने बेटे के फ़ोन से तुरंत डिलीट कर दिया और अपने बेटे को हस्पताल पहुँचाया।
हस्पताल की माने तो युवक की हालत अब पहले से बेहतर बताई जा रही है परंतु युवक होश में आते ही ज़ी न्यूज़ के संवादाता सुधीर चौधरी से डीएनए टेस्ट की विनती कर रहा है और डीएनए टेस्ट के परिणाम आने तक माँ-बाप को घर निकालकर वृधाश्रम भेज दिया है।
हालाकी उसे घरवालों ने प्यार से समझाया कि सुधीर चौधरी जिस डीएनए शो को होस्ट करता है उसका मनुष्य के डीएनए से कोई लेना देना नहीं है लेकिन युवक मानने को तैयार नहीं है।
इस हादसे के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव की स्तिथि है, एक ऐप परिवारों की ऐसी दुर्दशा कर सकती है इसकी कल्पना शायद ही किसी ने आज से दस साल पहले की होगी!